कान्हा में ‘जंगली भैंस’ की वापसी से हो रहा प्रदेश का वन्य वैभव समृद्ध

भोपाल

मध्यप्रदेश के वन्य जीव संरक्षण इतिहास में कान्हा टाइगर रिजर्व में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण के सफल संचालन से नया अध्याय जुड़ गया।  लगभग एक शताब्दी पूर्व प्रदेश के वनों से विलुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति की वापसी अब साकार हो रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व, मंडला के सुपखार परिक्षेत्र में शुक्रवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मती समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)  एल. कृष्णमूर्ति ने 4 और जंगली भैंसों को विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सफलतापूर्वक मुक्त किया। इस अवसर पर संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व  रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक (कोर)  प्रकाश वर्मा, उप संचालक (बफर) सु अमिथा के.बी., समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं स्थानीय वन अमला उपस्थित रहा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में वन विभाग जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिये विशेष अभियान चला रहा है। इसी के अंतर्गत असम के प्रसिद्ध काजीरंगा टाइगर रिजर्व से ‘जंगली भैंस’ को कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। सुपखार वह क्षेत्र है, जहां ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की उपस्थिति होने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।

परियोजना के प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को 4 ‘जंगली भैंस’ (1 नर और 3 मादा)  को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपखार स्थित विशेष बाड़े में मुक्त किया था। दूसरे चरण में 4 और जंगली भैंसों के आगमन के साथ कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर 8 हो गई है। आगामी चरणों में भी परियोजना को और विस्तार दिया जाएगा। इससे प्रदेश में जंगली भैंसों की स्थायी और स्वस्थ आबादी विकसित होगी।

काजीरंगा टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व तक लगभग 2,220 किलोमीटर की लंबी दूरी विशेष वन्यजीव परिवहन वाहनों से तय की गई। यात्रा के दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी करती रही। सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारी ने पूरे अभियान का नेतृत्व किया। यह अभियान लगभग 72 घंटे तक चला।

‘जंगली भैंस’ भारतीय वन्यजीव धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही यह वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है। ‘जंगली भैंस’ की वापसी से कान्हा क्षेत्र की जैव विविधता और अधिक समृद्ध होगी और परियोजना देश में वन्यजीव पुनर्स्थापना के सफल मॉडल के रूप में स्थापित हो सकेगी।

मध्यप्रदेश, बाघ, चीता और गिद्ध संरक्षण जैसे अभियानों के लिए पहचान बना चुका है। ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना अभियान से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है।

 

  • Related Posts

    कटनी पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में वित्तीय अपराधों एवं आमजन से धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कटनी जिले

    पूरी खबर पढ़े
    मध्यप्रदेश में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की उत्कृष्ट पहल

    भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की समय

    पूरी खबर पढ़े

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *