डीजल में अल्कोहल, कमर्शियल LPG में DME मिलाने की तैयारी, जानिए सरकार क्यों ले रही यह कदम

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने ब्लेंडेड डीजल और कमर्शियल LPG की शुरुआत की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इन ईंधनों के लिए गुणवत्ता मानकों को अंतिम रूप देने में जुटा है।

डीजल में 10% मिलेगा आइसोब्यूटाइल अल्कोहल
BIS उन मानकों को अंतिम रूप दे रहा है, जिनके तहत डीजल में 10% आइसोब्यूटाइल अल्कोहल (IBA) मिलाया जाएगा। IBA एक ज्वलनशील लिक्विड है, जो आमतौर पर अनाजों से बनता है। रिफाइनरियों और ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्रीज से मिले सुझावों के आधार पर ये मानक तैयार किए जा रहे हैं।

15 जून 2026 तक यह मानक जारी होने की उम्मीद है। BIS की टीम स्अेक होल्डर्स के साथ लगातार बैठकें कर रही है। आयातित क्रूड पर निर्भरता घटेगी और किसानों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया बाजार मिल सकता है।

कमर्शियल LPG में मिलाया जाएगा DME
सरकार ने कमर्शियल उपयोग के लिए DME (डाइमिथाइल ईथर) मिले LPG के मानकों को भी अंतिम रूप दे दिया है। DME प्राकृतिक गैस, कोयला और बायोमास से बनाया जा सकता है। इसके नोटिफिकेशन की संभावित तिथि 15 मई 2026 है। इस दिन संशोधित मानक जारी करने की संभावना है।

घरेलू LPG सिलेंडरों में अभी मिश्रण नहीं किया जाएगा। यह केवल होटल, रेस्टोरेंट, उद्योगों जैसे कमर्शियल यूजर के लिए होगा। अधिकारियों के अनुसार, DME मिश्रण घरेलू खाना पकाने के लिए फिलहाल उपयुक्त नहीं है।

ब्लेंडेड डीजल के लिए जल्द आएगा ड्राफ्ट
ब्लेंडेड डीजल के मसौदा मानक (Draft Standard) को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के डॉ. भारत नेवलकर की अगुवाई वाले वर्किंग ग्रुप ने तैयार किया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने फ्यूल कैरेक्टराइजेशन स्टडी किए, जिसके बाद और सैंपल टेस्ट किए गए। अंतिम अधिसूचना से पहले मानकों का ड्राफ्ट सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया जाएगा।

बता दें ऑटोमोटिव को छोड़कर घरेलू, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए भारत के पास पहले से LPG मिश्रण के लिए एक मानक मौजूद है, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया था। अब सरकार ने इसे केवल कमर्शियल इस्तेमाल के लिए प्राथमिकता देते हुए संशोधन का फैसला किया है।

पश्चिम एशिया संकट का एशियाई देशों पर असर
28 अप्रैल 2026 तक होर्मुज स्ट्रेट पर कोई बड़ी बातचीत नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एशियाई देशों का तेल-गैस आयात ठप है। भारत, चीन, जापान रूस-वेनेजुएला-अफ्रीका से नए सौदे कर रहे हैं। एशियाई देश अपने भंडार पर तीन-चार महीने चल सकते हैं, उसके बाद स्थिति गंभीर हो जाएगी। ऐसे में सरकारें ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहीं हैं। भारत की यह तैयारी भी इसी संकट से निपटने के लिए हो रही है।

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