नासिक
महाराष्ट्र के नासिक में TCS कंपनी में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और लोगों को धर्म बदलने के लिए उकसाने के मामले ने अब एक अलग मोड़ ले लिया है. 27 अप्रैल को मुख्य आरोपी निदा खान की अग्रिम जमानत अर्जी पर नासिक कोर्ट में दोनों पक्षों ने जोरदार बहस की. सरकारी वकीलों ने कोर्ट के सामने SIT द्वारा जांच के दौरान इकट्ठा किए गए चौंकाने वाले सबूत रखे कि कैसे निदा खान ने पीड़ित लड़की को दूसरे धर्म के तौर तरीके सिखाकर धर्म बदलने के लिए जाल बुना था. इस केस का दायरा अब सिर्फ नासिक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार मालेगांव और सीधे मलेशिया तक पहुंच गए हैं।
पीड़िता को सिखाई नमाज और नाम रखा ‘हानिया’
सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि निदा खान और दूसरे आरोपियों ने पीड़िता का धर्म छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाने के लिए उसे बुर्का दिया था. इतना ही नहीं, उसे इस्लाम की एक किताब दी थी और उसके मोबाइल पर धार्मिक शिक्षा देने वाले एप्लीकेशन इंस्टॉल कर दिए थे।
निदा खान पीड़िता को अपने घर ले जाती थी और उसे नमाज़ पढ़ने, हिजाब और बुर्का पहनने की सही ट्रेनिंग देती थी. हैरानी की बात यह है कि धर्म बदलने के बाद पीड़िता का नाम हनिया रखने का भी फैसला किया गया था. जांच के दौरान पीड़िता के मोबाइल में कई इस्लामिक रील, यूट्यूब लिंक और इंस्टाग्राम पोस्ट के सबूत मिले थे।
मलेशिया कनेक्शन और मालेगांव टीम
इस मामले के दूसरे आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता के एजुकेशनल और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपने कब्जे में ले लिए थे. ये डॉक्यूमेंट्स मालेगांव में एक टीम को दिए जाने थे और पीड़िता का नाम बदला जाना था. साथ ही, पीड़िता को मलेशिया में नौकरी के लिए इमरान नाम के एक आदमी के पास भेजने की तैयारी चल रही थी. सरकारी वकीलों ने कोर्ट को बताया कि अभी इस बात की जांच होनी बाकी है कि क्या इस पूरी साज़िश के लिए निदा खान को किसी ने पैसे की मदद दी थी और क्या इसके पीछे कोई देश विरोधी ताकतें हैं।
निदा को कभी भी अरेस्ट कर सकती है पुलिस
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिस्र ने कोर्ट में बताया कि निदा खान अभी फरार है और उसका मोबाइल फोन जब्त करके यह पता लगाना ज़रूरी है कि उसने और कितनी लड़कियों के साथ ऐसा किया है. अगर उसे बेल मिल जाती है तो वह गवाहों पर दबाव डाल सकती है. फिलहाल कोर्ट ने निदा खान को कोई प्रोटेक्शन नहीं दिया है, इसलिए पुलिस उसे कभी भी अरेस्ट कर सकती है. इन सभी दलीलों के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और आखिरी फैसला 2 मई को सुनाया जाएगा।
निदा खान के वकील ने आरोपों को नकारा
निदा खान के वकील राहुल कासलीवाल ने इन सब बात को नकारा है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम पहले दिन से कह रहे हैं कि महाराष्ट्र में धर्मपरिवर्तन का कानून नहीं है, उत्तर प्रदेश और बाकी स्टेट्स में लागू धर्म परिवर्तन कानून का हमने अभ्यास किया है. इस केस में जो भारतीय न्यायसंहिता अनुसार धाराएं लगाई गई है वह सिर्फ धार्मिक भावनाओं को आहत पहुंचना जैसी धाराएं लगाई गई हैं, धर्मपरिवर्तन हुआ ही नहीं है. इस मामले में अलग अलग FIR की गई हैं जबकि केस से जुड़ा स्थान और विक्टिम एक ही है. इसलिए एक ही FIR होनी चाहिए, ना कि अलग FIR , इस मामले में 9 FIR हैं।
कैसे खुला TCS कांड?
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप था कि एक कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही थी. इसी आधार पर पुलिस को शक हुआ और उन्होंने गुप्त जांच शुरू की, जो आगे चलकर बड़े खुलासे में बदली।
जांच के दौरान पुलिस ने महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी में तैनात किया, ताकि भीतर की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. इन अधिकारियों ने अंदर हो रही हर गतिविधि पर करीब से निगरानी रखी और अहम सबूत इकट्ठा किए।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ टीम लीडर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे थे और कर्मचारियों को चुनकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते हुए धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहे थे. मामले का खुलासा होने के बाद सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि निदा खान नाम की एक आरोपी अभी भी फरार बताई जा रही है।





