प्रदेश में अधिक से अधिक हों जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्य : जल संसाधन मंत्री सिलावट

प्रदेश में अधिक से अधिक हों जल संवर्धन और जल संरक्षण के कार्य : जल संसाधन मंत्री सिलावट

जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी ली बैठक

भोपाल

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के गांव-गांव, नगर-नगर में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारी समाज के सभी वर्गों एवं आमजन के सहयोग से अपने-अपने क्षेत्र में वृहत रूप से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य कराएं और इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाएं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान गत 19 मार्च से चलाया जा रहा है जो तीन माह तक चलेगा।

जल संसाधन मंत्री सिलावट ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी बैठक लेकर अभियान के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, अधीक्षण यंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, श्रीमती हर्षा जैनवाल एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में कराए जाने वाले कार्यों की कछारवार विस्तृत रूप रेखा तैयार कर आगामी 3 दिवस में प्रस्तुत की जाए। अभियान के सम्बन्ध में समय-समय पर विभाग द्वारा जारी विस्तृत दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक मैं बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा मुख्य रूप से जल संग्रहण स्रोतों के रख-रखाव एवं मरम्मत के अनुरूप अपूर्ण कार्यां को पूर्ण करना, निर्मित तालाब की पाल पर मिट्टी के कटाव अथवा अतिवर्षा से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनः निर्माण किये जाने, तालाबों की पिचिंग, बोल्डर टो तथा घाट आदि के मरम्मत का कार्य, जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकना, संपूर्ण नहर प्रणाली में घास, झाडी, छोटे पेड पोधे आदि की सफाई का कार्य एवं वृक्षारोपण, शहरी आबादी क्षेत्रों में प्रमुख नहरों का चिन्हाकंन व सीमांकन का कार्य, स्टाप डेम बैराज-वीयर के गेट इत्यादि की मरम्मत, बांध के फ्लस बार स्लूज बेल की मरम्मत तथा सफाई का कार्य, केचमेंट एरिया में अवरोध का चिन्हांकन कर उसे हटाना तथा अन्य आवश्यक तकनीकी कार्य आदि कराए जा रहे हैं। अधिकारियों को सभी कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ कराए जाने के निर्देश दिए गए।

 

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