पीएलआई विवाद पर बैंक कर्मियों का उबाल: देशभर में विरोध तेज, हड़ताल की चेतावनी

विवेक झा, भोपाल | 
संशोधित पीएलआई (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) योजना को लेकर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का विरोध अब तेज होता जा रहा है। भोपाल सहित मध्यप्रदेश और देशभर में बैंक कर्मियों ने इस योजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर कर्मचारी 21 मार्च से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ‘वर्क टू रूल’ के तहत अतिरिक्त कार्य से दूरी बना ली है।

बैंक कर्मचारियों का आरोप है कि वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) द्वारा प्रस्तावित नई पीएलआई नीति एकतरफा और भेदभावपूर्ण है। उनका कहना है कि यह योजना मौजूदा द्विपक्षीय समझौते की मूल भावना के खिलाफ है और इससे कर्मचारियों व अधिकारियों के बीच असमानता बढ़ेगी। इससे बैंकिंग व्यवस्था की एकता और कार्यसंस्कृति पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

यूएफबीयू के कोऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि यह मामला वर्तमान में मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी प्रकार का एकतरफा निर्णय औद्योगिक शांति के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तब तक इस तरह के निर्णय लागू नहीं किए जाने चाहिए।

‘वर्क टू रूल’ से प्रभावित हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं

प्रदर्शन के तहत बैंक कर्मचारी केवल निर्धारित समय और नियमों के अनुसार ही काम कर रहे हैं। अतिरिक्त जिम्मेदारियों और ओवरटाइम से दूरी बनाई जा रही है। इसका असर धीरे-धीरे बैंकिंग सेवाओं पर भी दिखने लगा है, जहां कामकाज की गति धीमी पड़ सकती है।

प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

यूएफबीयू ने वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और सभी बैंकों के शीर्ष प्रबंधन से मांग की है कि वे इस मुद्दे में तत्काल हस्तक्षेप करें और एकतरफा फैसलों पर रोक लगाएं। संगठन का कहना है कि संवाद के जरिए ही इस विवाद का न्यायसंगत समाधान निकाला जा सकता है।

हड़ताल की चेतावनी, कर्मचारियों से तैयार रहने की अपील

संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो बैंकिंग क्षेत्र में व्यापक असंतोष फैल सकता है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा। यूएफबीयू ने सभी बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की है कि वे अल्प सूचना पर हड़ताल के लिए तैयार रहें।

बैंकिंग सेक्टर में बढ़ सकता है तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर न केवल बैंकिंग सेवाओं पर पड़ेगा बल्कि आम ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार और बैंक प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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