विकास के लिए पूंजीगत व्यय सर्वोच्च प्राथमिकता : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने कहा कि दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की वित्तीय अनुशासन और विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई गति मिली है और निवेश का माहौल लगातार बेहतर हुआ है।

मध्यप्रदेश की राजकोषीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। नीति आयोग द्वारा जारी दूसरी वार्षिक “Fiscal Health Index 2026” रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन और राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश ने वर्ष 2021-22 से लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, जो मजबूत कर-संग्रह और राज्य के अपने राजस्व स्रोतों में वृद्धि का परिणाम है।

दूसरी वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य की राजस्व प्राप्तियाँ सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ी हैं। यह वृद्धि मुख्य रूप से जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों की प्रभावी वसूली के कारण संभव हुई है। फिस्कल हेल्थ इंडेक्स राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का व्यापक और तुलनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को प्रोत्साहित करता है।

उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कीर्तिमान होगा। वर्तमान में पूंजीगत व्यय राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4.8 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राज्य में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों, पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं जैसी अधोसंरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय 57,348 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2025-26 के पुनरीक्षित अनुमान में 74,662 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। यह वृद्धि 30 प्रतिशत से अधिक है और दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव तैयार करती है।

दूसरी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों में 58.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में राज्य के कर राजस्व में 62.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें स्टेट जीएसटी, व्यापार एवं बिक्री कर तथा राज्य आबकारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही पेंशन और ब्याज देनदारियों में वृद्धि के कारण प्रतिबद्ध व्यय कुल राजस्व व्यय का 43 प्रतिशत से अधिक हो गया है। राज्य सरकार ने पूंजीगत व्यय पर लगातार ध्यान बनाए रखा है, जो पिछले 5 वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है।

उप मुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि राज्य सरकार बुनियादी ढाँचे के निर्माण और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को प्राथमिकता दे रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य का ऋण स्तर अभी भी वैधानिक सीमाओं में है, जो वित्तीय अनुशासन और संतुलित राजकोषीय प्रबंधन को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत राजस्व आधार और अधोसंरचना में बढ़ते निवेश से मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि को दीर्घकालिक गति मिल सकती है और राज्य निवेश तथा औद्योगिक विकास के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन सकता है। 

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