इलाहाबाद और भांग पर CJI सूर्यकांत की टिप्पणी चर्चा में, आखिर क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली
CJI सूर्यकांत ने कहा कि इसे होली ब्रेक के बाद लिस्ट करो। नहीं नहीं, इसे उसके भी एक हफ्ते बाद करो। इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में। सीजेआई की यह हल्के-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में रोजाना कई मामलों की सुनवाई होती है। इसमें कुछ चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कोर्ट में होती है। शुक्रवार को हुई एक सुनवाई चर्चा का विषय बन गई। इसमें सीजेआई सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज में एक केस को लिस्ट करने के मामले में कहा कि इसे होली के हफ्तेभर बाद लिस्ट करो, क्योंकि इलाहाबाद है भाई, भांग का नशा उतरने में हफ्ताभर तो लग जाएगा।

बार एंड बेंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में सुरेश देवी वर्सेज हाई कोर्ट ऑफ इलाहाबाद से जुड़ी एक सुनवाई को लेकर सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ”इसे होली ब्रेक के बाद लिस्ट करो। नहीं नहीं, इसे उसके भी एक हफ्ते बाद करो। इलाहाबाद है भाई, एक हफ्ता तो लग जाएगा भांग का नशा उतरने में।” सीजेआई की यह हल्के-फुल्के अंदाज में की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

बता दें पूरे देशभर में होली धूमधाम से मनाई जाती है। प्रयागराज में भी होली के त्योहार को लेकर काफी उत्सुकता है। इस बार चार मार्च को रंग खेलने वाली होली पड़ रही है। कई जगह होली के दिन भांग का भी सेवन किया जाता है। माना जा रहा है कि इसी संदर्भ में सीजेआई सूर्यकांत ने यह मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की और मामले को सुनवाई के लिए होली के थोड़े और दिन बाद रखा।

वहीं, एक अन्य मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने एक वकील को जमकर फटकार लगाई। पूरन चंद्र सेन बनाम राजस्थान राज्य के मामले में सीजेआई सूर्यकांत ने वकील से कहा कि इन पर जुर्माना नहीं लगाया हाईकोर्ट ने? बंद वंद पहने नहीं हैं, लग रहा कोई दंगल में उतरने आया है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। फिर सीजेआई ने पूछा कि आपको वकालत करते हुए कितने साल हो गए है, जिसपर वकील ने कहा कि 1995 से कर रहा हूं।

सीजेआई सूर्यकांत इतना सुनते ही भड़क गए और पूछा कि आपको लाइसेंस देने की गलती किसने की। प्लीज ऐसी पिटीशन फाइल न करें। लोग आप पर विश्वास करते हैं। अगर आप यह सब फाइल करेंगे तो लोग आप पर विश्वास कैसे करेंगे। इस पर वकील ने कहा कि आरएसएस के आदर्श संविधान के खिलाफ है, जिस पर जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि अगर आप और दबाव डालेंगे तो हमें कॉस्ट बढ़ानी पड़ेगी। आपकी आइडियोलॉजी या पॉलिटिक्स वगैरह से राय अलग हो सकती है, लेकिन इससे कोई ऑफेंस नहीं होता या आप किसी अथॉरिटी के खिलाफ एफआईआर करने को नहीं कहते। कृपया पीछे हटें, खुद को शर्मिंदा न करें।

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