पीएम मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं: थरूर, बोले– RSS ने भी अब इसे स्वीकार किया

नई दिल्ली.
कांग्रेस लीडरशिप से मतभेद की अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता व सांसद शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री संविधान को पवित्र मानते हैं और आरएसएस तक ने भी इसे अपना लिया है। संविधान समय की कसौटी पर खरा उतरा है। थरूर ने ये सब बातें कोझिकोड में केरल लिटरेचर फेस्टिवल में दर्शकों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहीं।

शशि थरूर ने कहा, ”आपको याद होगा मैंने 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई थी, तब इसके बारे में लिखा था। उस समय बहुत बातें हो रही थीं कि वे संविधान को खत्म कर देंगे और एक नया संविधान लाएंगे। यहां तक कि यह भी रिपोर्ट किया गया था कि आरएसएस के विचारक गोविंदाचार्य एक नए संविधान का ड्राफ्ट लिख रहे थे। और फिर भी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि संविधान उनकी पवित्र किताब है। असल में, अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में अपने पहले भाषण में, उन्होंने कहा था कि संविधान ही मेरी एकमात्र पवित्र किताब है।”

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, ”मैसेज यही था कि वह संविधान को पवित्र मानते हैं। और नतीजा यह हुआ कि जिन्होंने संविधान को रिजेक्ट किया था, जैसा कि आरएसएस ने किया था, उन्होंने भी अब इसे अपना लिया है। तो मैं कहूंगा कि समय की कसौटी पर खुद को साबित किया है। इसने अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की सरकारों में बदलाव को झेला है और अब तो एक ऐसी पार्टी के सत्ता में आने का भी गवाह बना है जिसके आरएसएस में दार्शनिक पूर्वजों ने साफ तौर पर संविधान को रिजेक्ट कर दिया था, और फिर भी संविधान बचा रहा।”

इससे पहले शुक्रवार को केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने अहम बैठक की, लेकिन शशि थरूर इसमें नहीं शामिल हुए। इससे एक बार फिर से उनके और कांग्रेस लीडरशिप के बीच मतभेद की अटकलें लगाई जाने लगीं। थरूर के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया था। हालांकि, थरूर के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुए क्योंकि वह इस बात से आहत हैं कि राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।

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