साहित्य शब्दों का सौंदर्य नहीं, समय का साक्ष्य और प्रतिरोध की आवाज़ है : डॉ. रामप्रकाश त्रिपाठी

भोपाल। साहित्य केवल शब्दों की सजावट या भावनात्मक अभिव्यक्ति भर नहीं है, बल्कि वह समाज की सामूहिक चेतना, संवाद और समय की सच्ची तस्वीर भी होता है। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मी डॉ. रामप्रकाश त्रिपाठी ने व्यक्त किए। वे मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की भोपाल जिला इकाई के तत्वावधान में आयोजित शायर इंद्रपाल सिंह ‘तन्हा’ के ग़ज़ल संग्रह ‘ठहरा हुआ वक़्त’ के लोकार्पण एवं चर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।

डॉ. रामप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि ‘ठहरा हुआ वक़्त’ केवल एक ग़ज़ल संग्रह नहीं, बल्कि हमारे समय, राजनीति और सामाजिक हालात का संवेदनशील दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि तन्हा की ग़ज़लें शोर नहीं मचातीं, न ही नारेबाज़ी करती हैं, बल्कि वे चुपचाप पाठक के भीतर उतरती हैं, उसे असहज करती हैं और सोचने पर मजबूर करती हैं। यही साहित्य की असली ताकत है, जहां शब्द प्रतिरोध की भाषा बन जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इंद्रपाल सिंह ‘तन्हा’ की शायरी में पीड़ा, बेचैनी और सवालों की गूंज साफ़ सुनाई देती है, जो आज के समाज की सच्ची तस्वीर पेश करती है। यह ग़ज़लें मनोरंजन से आगे जाकर सामाजिक सरोकारों से संवाद करती हैं।

कार्यक्रम में ग़ज़ल संग्रह पर चर्चा करते हुए शायर बद्र वास्ती और साहित्यकार अपर्णा पात्रीकर ने इसे दुष्यंत कुमार की ग़ज़ल परंपरा और विरासत का विस्तार बताया। अपर्णा पात्रीकर ने कहा कि ‘ठहरा हुआ वक़्त’ में ‘ग़मे-दौरां’ की स्पष्ट झलक मिलती है, जहां व्यक्तिगत पीड़ा सामाजिक यथार्थ से जुड़ जाती है। वहीं बद्र वास्ती ने कहा कि इंद्रपाल सिंह ‘तन्हा’ ने इशारों, प्रतीकों और सशक्त बिंबों के माध्यम से अपने शेरों को बेहद खूबसूरत और प्रभावी भाषा में पिरोया है। उन्होंने कहा कि तन्हा की ग़ज़लें वर्तमान व्यवस्था के हर पहलू पर बेबाक टिप्पणी करती हैं।

गौरतलब है कि ‘ठहरा हुआ वक़्त’ इंद्रपाल सिंह ‘तन्हा’ का दूसरा ग़ज़ल संग्रह है। इससे पहले उनका पहला संग्रह ‘सारा शहर’ लगभग ढाई दशक पहले प्रकाशित हुआ था, जिसे साहित्य जगत में विशेष सराहना मिली थी। नए संग्रह में भी समय की ठहराव, सामाजिक बेचैनी और आम आदमी की पीड़ा को केंद्र में रखा गया है।

कार्यक्रम की रूपरेखा मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की भोपाल इकाई के अध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता ने प्रस्तुत की और स्वागत उद्बोधन दिया। इकाई के सचिव महेश दुबे ‘मनुज’ ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शायर इंद्रपाल सिंह ‘तन्हा’ ने अपने संग्रह से चयनित ग़ज़लों का पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

कार्यक्रम का संचालन शैलेन्द्र कुमार शैली ने किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह, वरिष्ठ कवि राजेश जोशी, महेश अग्रवाल, सुरेश गुप्ता सहित अनेक साहित्यकार, कवि और साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम साहित्यिक संवाद और समकालीन विमर्श का सशक्त मंच बनकर उभरा।

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