फरीदाबाद में ब्रेनवॉश के बावजूद जसीर वानी ने सुसाइड बॉम्बर बनने से किया इनकार

श्रीनगर

दिल्ली ब्लास्ट में एक नहीं बल्कि दो सुसाइड बॉम्बर होने वाले थे. लेकिन ऐन मौके पर जसीर बिलाल नाम के कश्मीरी युवक ने फिदायीन दस्ते में शामिल होने से इनकार कर दिया. जसीर बिलाल ने कहा कि इस्लाम में सुसाइड बॉम्बर बनना पाप है. दिल्ली ब्लास्ट की जांच कर रहे एजेंसियों ने जसीर बिलाल नाम के युवक को हिरासत में लिया है. 

काजीगुंड निवासी जसीर (उर्फ ‘दानिश’ उर्फ जसीर बिलाल) को श्रीनगर पुलिस ने हाल ही में दिल्ली के लाल किले में हुए कार बम विस्फोट और “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” के सिलसिले में हिरासत में लिया था. जांच से पता चला कि मॉड्यूल के मास्टरमाइंड डॉ. उमर नबी ने जसीर का ब्रेनवॉश किया था और उसे आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार किया था. डॉ उमर नबी ने ही दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के बगल में कार से धमाका किया गया था. इस हमले में 15 लोगों की मौत हो चुकी है.

फरीदाबाद में विस्फोटकों की बरामदगी के मामले में गिरफ्तार डॉक्टरों ने पूछताछ में खुलासा किया कि राजनीति विज्ञान के छात्र जसीर बिलाल को डॉ उमर द्वारा 2023 से ही आत्मघाती बम विस्फोट के लिए कट्टरपंथी बनाया जा रहा था, लेकिन जब 2025 में उसे हमला करने के लिए कहा गया तो उसने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इस्लाम में आत्महत्या गुनाह है. 

सुसाइड बॉम्बिंग को जायज ठहराता दिखा आतंकी उमर

इस बीच आज आतंकी डॉ उमर का एक वीडियो वायरल हुआ है. इस वीडियो में उमर अंग्रेजी में बयान देता नजर आ रहा है, उमर अपने बयान में सुसाइड बॉम्बिंग को सही ठहराता हुआ नजर आ रहा है. वो कहता है कि सुसाइड बॉम्बिंग को ठीक से समझा नहीं गया है.

श्रीनगर से फरीदाबाद लाया गया जसीर

रिपोर्ट के अनुसार जसीर बिलाल की इस आतंकी गिरोह के सदस्यों के साथ मुलाकात कुलगाम में अक्तूबर 2023 में हुई थी. उसे हरियाणा के फरीदाबाद में अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास एक किराए के मकान में ले जाया गया जहां विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. उमर नबी ने आत्मघाती हमला करने के लिए कई महीनों तक उसका गहन ब्रेनवॉश किया. 

सुसाइड बॉम्बर क्यों नहीं बना जसीर

अप्रैल 2025 में जसीर के पीछे हटने पर यह योजना विफल हो गई. जसीर ने सुसाइड बॉम्बर न बनने के पीछे दो वजहें बताई. जसीर ने कहा कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है, और सबसे अहम बात यह है कि उसका यह विश्वास था कि इस्लाम में आत्महत्या वर्जित है.

मॉड्यूल के अन्य सदस्य शुरू में उसे एक ओवर-ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम पर रखना चाहते थे, लेकिन डॉ. उमर ने उसे एक आत्मघाती हमलावर बनाने पर जोर दिया.

जसीर के इनकार के बाद माना जाता है कि डॉ. उमर खुद आत्मघाती हमलावर बन गया और विस्फोटकों से लदी एक कार चला रहा था, जो 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास ब्लास्ट हो गया है. इसमें 14 लोगों की मौत हो गई. कार में मिले मानव अवशेषों के डीएनए नमूने डॉ उमर की मां के डीएनए नमूनों से मेल खाते थे जिससे हमलावर के रूप में उसकी पहचान की पुष्टि हुई. 

जसीर का पता इस केस के दूसरे आरोपियों डॉ अदील राथर और डॉ मुजफ्फर गनई की गिरफ्तारी के बाद चला. जसीर से पूछताछ के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस को प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पूरे अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा करने में मदद मिली. 

जसीर के पिता ने खुद को लगाई आग

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जसीर के पिता बिलाल वानी को पूछताछ के लिए बुलाया था. इस दौरान बिलाल वानी ने खुद को आग लगा लिया. बिलाल वानी को गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई. 

यह घटना जसीर बिलाल और उसके चाचा नवीद वानी को दिल्ली लाल किला कार विस्फोट और उससे जुड़े आतंकी मॉड्यूल के सिलसिले में पूछताछ के लिए पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद हुई. 

बिलाल वानी ने कथित तौर पर अपने हिरासत में लिए गए बेटे और भाई से बार-बार मिलने की अनुमति न मिलने पर खुद को आग लगा ली थी. वह बुरी तरह झुलस गया और उसे अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया. यहां से उसे श्रीनगर के श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल रेफर कर दिया गया था. इस घटना ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पुलिस अधिकारियों की निंदा की है.   

जसीर को अभी भी हिरासत में रखा गया है. उसे आज दिल्ली में अदालत में पेश किया गया है.इस घटना ने इस बात को उजागर किया है कि कैसे डॉक्टरों सहित अच्छे पढ़े-लिखे लोगों को कथित तौर पर कट्टरपंथी बनाया गया और एक आतंकवादी साजिश में शामिल किया गया. 

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